Latasinha’s Weblog

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Bhartiya (Indian)

भारतीय

कुछ दिन पहले ही

एक आयोजन था

मुद्दा था –

राष्ट्रियता और भारतीयता.

किया उदघातन

धुरन्ध्र् र दल बदलू नेता ने,

भाषण दिये विद्वानो ने

नार था सब्का एक

’विभिन्न्ता मे एकता का’

हम भारतीय है’

बार बार यह बतलाया.

जैसे सम्पन्न देशो को देखकर

लोगो को यह कहते पाया गया.

पैसा है पर तह्जीब नही

ऐसा ही कुछ् उन्होने समझाया

आमेरिका?

वह कौन है

वहां कोई इतालवी , कोई फ्रांसीसी ,

तो कोई ब्रतानवी है।

पैसा तो है पर सांस्क्रतिक परम्परा नहीं।

हमारी परम्परा तो,

सदियों पुरानी है,

जिसमे कहीं तो कुछ ऐसा है

जो हमें जोड़ता है,

टूटने से बचाता है।आदत से मजबूर

उस कुछ को ढ़ूढ़ने निकल पड़ा।

पास बैठे व्यक्ति से पूछा

बन्धुवर! आपका परिचय?

बोले वे ’मैं बंगाली हूँ’

लगा मैंने कहीं कुछ गलत सुन लिया

अतः ज़ारी की पुछ्ताछ।

अब तो क्रमशः आई आवाजें

‘मैं गुजराती हूँ’

‘मैं आसामी हूँ”

‘मैं मद्रासी हूँ।

मैं घबराया और पूछ ही बैठा सबसे

‘भाई इन सब में भारतीय कहाँ है‘?

भीड़ में दूर से एक दबी-सी, घुटी-सी

आवाज आई

‘भारतीय अब प्रवासी है‘

by Mr. K.N.Sinha

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February 5, 2013 - Posted by | General | , , ,

1 Comment »

  1. vow…..

    Comment by ramasparentingtips | February 5, 2013 | Reply


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